दिनोंदिन कोरोना की रफ्तार बढ़ने से मेरठ के स्कूल प्रबंधकों में मची खलबली, घिरने लगी हैं चिंता

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  • कोरोना की रफ्तार बढ़ने से मेरठ के स्कूल प्रबंधकों में मची खलबली, घिरने लगी हैं चिंता
  • कोरोना काल से उबरने के लिए स्कूल प्रबंधकों ने इस बार विज्ञापनों में खूब पैसे खर्च किया। तरह-तरह के प्रचार माध्यम से बच्चों को आकर्षित करने के तौर-तरीके अपनाए गए। मेरठ की सड़कों को बड़े-बड़े होर्डिंग से पाट दिया गया।
  • रोजाना खबर’ से अनौपचारिक बातचीत में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों स्कूल के मालिकों ने प्रिंसिपल ने यह स्वीकार किया है कि कोरोना की रफ्तार बढ़ने से उनके अंदर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं।

विभूति रस्तोगी, मेरठ

बीते 1 साल से करोना के कारण मंदी की मार झेल रहे स्कूल प्रबंधकों को मेरठ में कोरोना की बढ़ती आहट ने चिंता में डाल दिया है। कोरोना काल से उबरने के लिए स्कूल प्रबंधकों ने इस बार विज्ञापनों में खूब पैसे खर्च किया। तरह-तरह के प्रचार माध्यम से बच्चों को आकर्षित करने के तौर-तरीके अपनाए गए। मेरठ की सड़कों को बड़े-बड़े होर्डिंग से पाट दिया गया।

पिछले साल कमोवेश सभी स्कूलों को फीस की बड़ी मार झेलनी पड़ी थी। लिहाजा बदले माहौल में स्कूल वालों ने विज्ञापनों की रफ्तार तेज करके बच्चों और अभिभावकों को आकर्षित करने का जो तरीका अपनाया था उस पर कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने पानी फिरता फिर दिया है। उन्हें डर इस बात का सताने लगा है कि पिछले साल जिस प्रकार मंदी की मार झेल चुके हैं और इस बार विज्ञापनों में इतना खर्च करने के बाद भी अगर करोना फिर से मेरठ में हावी हो गया तो ऐसे में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

‘रोजाना खबर’ से अनौपचारिक बातचीत में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों स्कूल के मालिकों ने प्रिंसिपल ने यह स्वीकार किया है कि कोरोना की रफ्तार बढ़ने से उनके अंदर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं। उनका कहना है इस बार सब कुछ अच्छा होता दिख रहा था क्योंकि कोरोना की वैक्सीन आने से स्कूल प्रबंधक आश्वस्त थे कि कोरोना की रफ्तार में कमी आएगी। लेकिन वैक्सीनेशन के बीच में जिस प्रकार से करोना रिटर्न्स होने लगा है उससे तो लगता है कि स्कूल प्रबंधकों में चिंता लाजमी है।

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