ऑनलाइन शिक्षा से बच्चों की नींव हो रही है कमजोर, स्टूडेंट और टीचर में ‘EYE-CONTACT’ बहुत ही जरूरी: प्रेम मेहता

देश-दुनिया शिक्षा

  EXCLUSIVE INTERVIEW

  • मेरठ के नामचीन पब्लिक स्कूलों के संगठन ‘सहोदय’ के अध्यक्ष प्रेम मेहता से रोजाना खबर के मैनेजिंग एडिटर विभु रस्तोगी ने ऑनलाइन शिक्षा को लेकर एक्सक्लूसिव बातचीत की
  • भारत जैसे देशों में जहां पर ‘गुरु शिक्षा’ सबसे बड़ा माना जाता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा ने बच्चों को खोखला कर दिया है
  • ऑनलाइन शिक्षा से एक बात तो साफ हुई कि करोना और लॉकडाउन में अगर ऑनलाइन शिक्षा भी नहीं दी जाती तो बच्चे एक साल में पढ़ाई से बिल्कुल हट चुके होते
  • ऑनलाइन शिक्षा पढ़ाई के लिए उतना कारगर नहीं है जितना ऑफलाइन शिक्षा के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाता है: सहोदय अध्यक्ष

विभु रस्तोगी, मैनेजिंग एडिटर

मेरठ। कोरोना को लेकर जिस प्रकार से देश में बीते साल लॉकडाउन हुए और लॉकडाउन में 1 साल से स्कूल कमोवेश बंद रहे। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देकर पढ़ाई को काफी हद तक पटरी पर बनाये रखने का प्रयास किया गया। हालांकि 30 से 40 फ़ीसदी बच्चों ने ऑनलाइन शिक्षा में अपनी पढ़ाई की दिशा और दशा ठीक रखी, लेकिन 50 से 60 फीसदी बच्चे महज पढ़ाई की खानापूर्ति ही करते नजर आए। लेकिन ऑनलाइन शिक्षा से एक बात तो साफ हुई कि करोना और लॉकडाउन में अगर ऑनलाइन शिक्षा भी नहीं दी जाती तो बच्चे एक साल में पढ़ाई से बिल्कुल हट चुके होते।

लिहाजा पढ़ाई की नींव को बरकरार रखने के लिए स्कूलों ने फटाफट ऑनलाइन शिक्षा शिक्षा की व्यवस्था की और टीचरों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए प्रशिक्षित किया। ऑनलाइन शिक्षा के लिए ऐप डाउनलोड किए गए। पेरेंट्स को भी ऑनलाइन शिक्षा से रूबरू करवाया गया। उनके मोबाइल में भी ऐप डाउनलोड करवाए गए ताकि बच्चे घर बैठे ऑनलाइन शिक्षा से अपनी स्थिति को मजबूत कर सकें। लेकिन ऑनलाइन शिक्षा पढ़ाई के लिए उतना कारगर नहीं है जितना ऑफलाइन शिक्षा के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाता है।

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“बच्चे जब तक टीचर से रूबरू नहीं होते हैं और जब तक ‘FACE TO FACE’ से बातचीत नहीं करते हैं तब तक पढ़ाई का सही अर्थ सामने नहीं आ पाता है”


ऑनलाइन शिक्षा किसी भी तरीके से क्लासरूम शिक्षा की जगह नहीं ले सकता है: प्रेम मेहता

मेरठ के नामचीन पब्लिक स्कूलों के संगठन ‘सहोदय’ के अध्यक्ष प्रेम मेहता से रोजाना खबर के मैनेजिंग एडिटर विभु रस्तोगी ने ऑनलाइन शिक्षा को लेकर एक्सक्लूसिव बातचीत की। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था के लिए बस खानापूर्ति ही करार दिया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन और करोना काल में हमारे पास ऑनलाइन के अलावा कोई विकल्प मौजूद नहीं था लिहाजा बच्चों को पढ़ाई की ओर झुकाव बरकरार रखने के लिए सभी स्कूलों व सभी टीचरों ने शिद्दत के साथ मेहनत करके ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था को सफ़लीभूत किया और बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा घर बैठे प्रदान की। हालांकि प्रेम मेहता ने ‘रोजाना खबर’ से खास बातचीत में स्पष्ट किया कि ऑनलाइन शिक्षा किसी भी तरीके से क्लासरूम शिक्षा की जगह नहीं ले सकता है।

सहोदय’ अध्यक्ष और सिटी वोकेशनल स्कूल के डायरेक्टर प्रेम मेहता ने किया स्पष्ट

सहोदय’ अध्यक्ष और सिटी वोकेशनल स्कूल के डायरेक्टर प्रेम मेहता ने साफ किया कि जब तक टीचर और स्टूडेंट में क्लास रूम में ‘EYE CONTACT’ नहीं होता तब तक बच्चे की पढ़ाई का सही अर्थ में सामने नहीं आता है। उनका कहना है कि क्लासरूम व्यवस्था ही सर्वोत्तम पढ़ाई की व्यवस्था है, क्योंकि बच्चे जब तक टीचर से रूबरू नहीं होते हैं और जब तक ‘FACE TO FACE’ से बातचीत नहीं करते हैं तब तक पढ़ाई का सही अर्थ सामने नहीं आ पाता है। खासकर भारत जैसे देशों में जहां पर ‘गुरु शिक्षा’ सबसे बड़ा माना जाता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा ने बच्चों को खोखला कर दिया है। कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा से बच्चे बेशक पढ़ाई कर चुके हो लेकिन अब जरूरत है कि किसी भी रूप में बच्चों की संख्या कम करके ही सही ऑफलाइन शिक्षा, क्लास रूम की शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की जरूरत है। नहीं तो ऐसे में बच्चों का पढ़ाई के तरफ से लगाव व झुकाव बिल्कुल ही खत्म होता चला जाएगा।

बच्चे पढ़ाई से अलग होते चले जाएंगे और इससे बच्चों की नींव कमजोर होती चली जाएगी। इसलिए किसी भी रूप में चाहे बच्चों की संख्या को कम करके ही चाहिए क्लास रूम की शिक्षा ऑफलाइन शिक्षा बहुत जरूरी है। टीचर का डर भी बच्चों के अंदर होता है। स्कूल में अनुशासन की शिक्षा मिलती है और टीचर के मान सम्मान के प्रति बच्चों का झुकाव बढ़ता है। डर का वातावरण पैदा होता है जिससे पढ़ाई का वातावरण उज्जवल होता है। सहोदय अध्यक्ष श्री मेहता ने साफ कर दिया ऑफलाइन शिक्षा ही भारत की मजबूत शिक्षा प्रणाली हो सकती है।

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