पहली वार्ता-रोजाना खबर ने सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त छात्रा की जान बचाने में निभाई अहम भूमिका

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पहली वार्ता के मैनेजिंग एडिटर विभूति रस्तोगी व मार्केटिंग हेड सौरभ गुप्ता ने ततपरता दिखाते हुए सड़क पर एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल केएल की छात्रा को हॉस्पिटल भेजने में मदद की

स्कूटी के नम्बर से पिता का नाम पता करके रोजाना खबर के 50 हज़ार मोबाइल नेटवर्क पर डाला जिससे परिवार को घटना की जानकारी मिली

हिना रस्तोगी, संपादक

किसी ने ठीक ही कहा है, ‘हिम्मते मर्दे, मददे खुदा’…, जी हां, इस कथन को गुरुवार की रात को पहली वार्ता-रोजाना खबर के मैनेजिंग एडिटर विभूति रस्तोगी व मार्केटिंग हेड सौरभ गुप्ता ने बखूबी चरितार्थ किया। जिससे स्कूटी सवार छात्रा की जान बच सकी।

दरअसल, पूरा मामला यह है कि पहली वार्ता के मैनेजिंग एडिटर विभूति रस्तोगी मार्केटिंग हेड सौरभ गुप्ता न्यूज़ कवरेज करके साकेत से लौट रहे थे। सर्किट हाउस से आगे बढ़ते ही पुलिस लाइन्स आवास के पास अंधेरे सड़क पर एक छात्रा जोर जोर से चीख रही थी। बिना देरी किये जब वे वहां रुके तो घटना को देखकर एकबारगी वे दोनों ठिठक गए। देखा तो स्कूटी एक ओर गिरी हुई थी और एक छात्रा मुंह की ओर से सड़क पर बुरी तरह से लहूलुहान अचेत पड़ी हुई थी। उसके साथ स्कूटी पर जो दूसरी छात्रा थी वे जोर-जोर से चिल्ला रही थी।

सबसे पहले मैनेजिंग एडिटर विभूति ने बुरी तरह घायल व अचेत पड़ी लड़की को सीधा किया। फिर दूसरी लड़की से बोले वे छाती पर पंप करे। जब उससे कुछ नहीं हुआ तो तो सड़क पर वाहनों को रोकने की कोशिश करने लगें। कोई रुक ही नहीं रहा था। काफी देर बाद कुछ कार व बाइक सवार रुके। फिर विभूति ने जोर जोर से चिल्लाते हुए बोला भीड़ में कोई डॉक्टर होतो कुछ मदद करें। एक नर्सिंग स्टाफ ने आगे बढ़कर घायल अचेत लड़की की छाती पर जोर-जोर से पम्प किया। तब जाकर लड़की के मुंह से चीख निकली। उसे तुरंत ई-रिक्शा से पहली वार्ता के मैनेजिंग एडिटर विभूति रस्तोगी व मार्केटिंग हेड सौरभ गुप्ता ने ततपरता दिखाते हुए सड़क पर एक्सीडेंट में बुरी तरह घायल केएल की छात्रा को लोकप्रिय हॉस्पिटल भेजने में मदद की। स्कूटी को कोई ले जा रहा था। उसके हाथों से मैनेजिंग एडिटर विभूति रस्तोगी ने स्कूटी लेकर पुलिस लाइन्स के आवास में सुरक्षित खड़ी की। उसके बाद स्कूटी के नम्बर को अपने भांजे सृजन रस्तोगी को भेजा। उन्होंने परिवहन विभाग की साइट से पिता का नाम पता किया।

पिता का नाम आदेश रोहिला निकला। अब चुनौती पिता को ढूढने की हुई। इसमें रोजाना खबर के 50 हज़ार मोबाइल नेटवर्क ने बड़ी भूमिका निभाई। ग्रुप पर डाला जिससे परिवार को घटना की जानकारी मिली। परिवार वाले तुरंत लोकप्रिय हॉस्पिटल पहुंचे। उससे पहले इलाज शुरू हो चुका था। भगवान का लाख लाख शुक्र रहा की समय रहते भगवान ने पहली वार्ता-रोजाना खबर के दो कर्तव्यनिष्ट व्यक्तियों विभूति रस्तोगी व सौरभ गुप्ता को अपना दूत बनाकर भेज दिया। जिससे केएल की छात्रा की जान बच गई।

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