Marital Rape पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब

कोर्ट देश-दुनिया

भावना वर्मा/ रोजाना खबर

कोर्ट ने केन्द्र सरकार से 15 फरवरी तक अपना जवाब देने के लिए कहा है। इस अपवाद में कहा गया है कि किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी के साथ यौन संबंध, पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम नहीं होना, बलात्कार नहीं है।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 (बलात्कार) के अपवाद 2 पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार है। इस मामले में कोर्ट ने केन्द्र सरकार से 15 फरवरी तक अपना जवाब देने के लिए कहा है। इस अपवाद में कहा गया है कि किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी के साथ यौन संबंध, पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम नहीं होना, बलात्कार नहीं है। आम बोलचाल की भाषा में इस अपवाद को ‘मैरिटल रेप’ को संरक्षण देने वाला कहा जाता है। इन याचिकाओं में से एक याचिका इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट के विभाजित आदेश के संबंध में दायर की गई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला ने विभिन्न पक्षों की ओर से पेश होने वाले सभी वकीलों को निर्देश दिया कि वे अदालत द्वारा नियुक्त दो नोडल वकील के साथ सहयोग करें, उन्हें ऐसे दस्तावेजी और अन्य सामग्री की आपूर्ति करें, जिस पर वे सबमिशन के दौरान भरोसा करना चाहते हैं। पीठ ने मामले को अंतिम निस्तारण के लिए 21 मार्च को सूचीबद्ध किया। इसने केंद्र सरकार को याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

खंडपीठ के समक्ष याचिकाओं के तीन सेट हैं। पहली अपील एक पति द्वारा 23 मार्च, 2022 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 375 के तहत आरोप तय करने को बरकरार रखा गया था। दूसरा 11 मई, 2022 को दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडित फैसले से उत्पन्न होने वाली अपीलों का एक बैच है, और अंतिम वैवाहिक बलात्कार अपवाद को चुनौती देने वाली संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिकाएं हैं।

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